चिंता का कारण और उसके उपचार

चिंता मानसिक रोग होने के साथ एक शारीरिक रोग भी है. क्योंकि चिंता जब हम करते है तो मन ही मन करते है, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया बाहर दिखती है. चिंता, तनाव, डर ये सब एक ही नाम है. सामान्यतः सभी व्यक्ति चिंता करते है, सभी को कभी ना कभी डर का आभास अवश्य होता है. बात ये है की जब व्यक्ति चिंता में होता है तब वो किसी और को सुनना  पसंद नहीं करता क्यूंकि वह सही और गलत की पहचान भूल जाता है. चिंता ही एक ऐसे बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं फिर भी जितनी समझ मुझे हुई उतना ही आज के इस पोस्ट में आप से शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके.चिंता का अनुभव व्यक्ति को तब होता है, जब वह किसी परीक्षा के लिए या किसी के आने का इन्तजार करता है. जब हम चिंता करते है तब चेहरे की 72 नसें और मांश-पेशियाँ उपयोग में लाते है. लेकिन जब आप मुस्कुराते तब इनमे से सिर्फ 4 का उपयोग करते है. चिंता का मुख्य कारन है हमेशा भूत या भविष्य में जीना।चिंता को भय या आशंका के रूप में परिभाषित किया जा सकता है. हृदय गति का तेज होना, सांस फूलना, बेहोश हो जाना भूख ना लगना इत्यादि चिंता के लक्षण है. चिंता का प्रकोप कभी कभी इतना भयंकर होता है की मनुष्य को कई तरह के भयंकर से भयंकर रोग हो जाता है है, व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है.आज हम चिंता के कारन और उसके उपचार के बारे में जानेंगे।

चिंता क्या है?

ऐसे भय जो व्यक्ति में बहुत ज्यादा समय तक बने रहे, स्थिति स्पष्ट ना हो की क्या करना है, क्या नहीं करना है. व्यक्तियों में चिंता अन्य रोगो के अपेक्षा  ज्यादा पाई जाती है. “अपराधबोध से पीड़ित व्यक्ति बेचैनी का अनुभव करता है वह अस्पष्ट  और दिशाहीन स्तिथि का अनुभव करता है, जिसका स्रोत वह स्वयं भी नहीं बता पाता है”.
इस रोग की  प्रमुख विशेषता रोगी की व्यापक और दिशाहीन चिंता है जो ना तो  किसी विशेष पदार्थ से उत्पन्न होती है , और ना ही किसी महत्वपूर्ण बात से जुडी होती है. ऐसे  चिंता से किसी विशेष लक्ष्य, गंतव्य दिशा का ज्ञान भी नहीं होता है.

चिंता के लक्षण

  • सामान्यतः चिंता में भविष्य के लिए व्याकुलता , सतर्कता आदि लक्षण पाए जाते है. इसके अंतर्गत व्यक्ति की तनाव पेशियाँ  भी सम्मिलित होता है, जिसमे व्यक्ति कमजोर और तनावग्रस्त रहता है, परेशान सा रहता है तथा आराम नहीं कर पाता है.
  • इस स्तिथि में रोगी को लगातार चिंता बनी रहती है. भय, आशंका की भावना का विस्तृत रूप ही चिंता है. इस स्तिथि में दौरे पड़ना, बार- बार पेशाब आना, रक्तचाप बढ़ जाना, सांस फूलना, अपचता की शिकायत होना, आदि ऐसे लक्षण व्यक्ति के अंदर पाए जाते है.
  • चिंता की स्थिति में हृदय गति की रुकने की सम्भावना बढ़ जाती है.
  • ऐसे स्तिथि में व्यक्ति को लगातार अर्थात बिना रुके दौरे पड़ते रहते है, जिसमें  व्यक्ति को डर सा लगता रहता है.

चिंता के कारन

निर्णय

सामान्यतः ऐसे  व्यक्ति अपनी परेशानियों का निष्कर्ष नहीं निकाल पाते जिनमे आत्मविश्वास की कमी होती है. जिसकी वजह से कभी-कभी उन्हें अपने संवेदनशीलता के कारन अपनी आत्म-रक्षा के धूमिल होने की आशंका हो जाती है. जिसके कारण व्यक्ति को अत्यधिक चिंता हो जाती है.

निराशा

चिंता का एक मुख्य कारण निराशा भी है. व्यक्ति जब  अपने जीवन के कई क्षेत्रों में विफल हो जाता है तब वह घोर निराशाओं के सागर में डूब जाता है. चिंता के कारन  होने वाला निराशा की स्थिति में व्यक्ति अपने आप को बिलकुल अकेला महसूस करने लगता है, कभी-कभी आत्महत्या तक कर बैठता है.

अप्रिय इच्छा

कभी-कभी व्यक्ति के सामने ऐसे स्तिथि आती है, की वह अपनी कुछ इच्छाओँ पर नियंत्रण तो करना चाहता है लेकिन वह इच्छाएँ बार-बार उसके चेतन में आने से उस व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास की कमी होने लगती है. व्यक्ति चिड़चिड़ापन स्वाभाव का हो जाता है.

अन्य कारण

इन कारणों के आलावा भी चिंता के कुछ और भी कारण है। जैसे- अधिक विषमता, परिवार के वातावरण का अशांत होना, जीवन में अत्यधिक कठिनाइयाँ एवं समस्याएं, अरुचिकर व्यवसाय आदि.

चिंता के उपचार

औषधि से

चिंता से ग्रस्त व्यक्ति को हल्की  औषधियों का सेवन करने से थोड़ा बहुत आराम मिलता है. परन्तु उसकी जीवन शैली में कोई परिवर्तन नहीं होता है. इसीलिए इस उपचार को रोगी का स्थायी उपचार नहीं समझा जाता है.

मनोचिकित्सा से

इस चिकित्सा से चिंता के रोगियों को स्थायी रूप से आराम मिलता है. मनोचिकित्सक इस विधि के अंतर्गत व्यक्ति को काल्पनिक और वास्तविक परिस्थितियों के मध्य भेद करना सिखाते है, जिससे व्यक्ति चिंता से मुक्ति प्राप्त कर लेता है. चिंतित रोगी के लिए यह उपचार  सबसे उत्तम है.

मनोविश्लेषण विधि

इस विधि में रोगी  के अंदर दबे हुए इच्छाओं को व्यक्त करने का मौका दिया जाता है. जिसके फलस्वरूप व्यक्ति दबे हुए  इच्छाओँ से पैदा हुए मानसिक तनावों से मुक्ति पा लेता है.

तनाव प्रबंधन

यदि आप अपने चिंता को दूर करना चाहते है, तो उसके लिए सबसे जरुरी है तनाव का कम करना। तनाव कम करने का  आसान सा तरीका व्यायाम है. यदि आपको किसी चीज का शौक है तो उसके लिए समय निकाले, ऐसा करने से आपको अच्छा महसूस होगा। हमेशा खुश रहे.

चिंतामुक्त होने के लिए अपने खान-पान पर नियंत्रण रखे, संतुलित एवं सही डाइट ले. नियमित योग करे, प्राणायाम करे. रोज रात को सोने से पहले एक डायरी लिखे जिसमे अपने पुरे दिन का विवरण लिखे। ऐसा करने से आप चिंतामुक्त रहेंगे और अपनी जिंदगी सही तरीके जी सकेंगे। यदि आप नियमित रूप से ये सब काम करते है तो फिर तनाव या चिंता का होना असंभव है. फिर भी यदि आप किसी सकारात्मक कार्य को लेकर चिंतित होते है तो घबराने की कोई बात नहीं,क्यूंकि किसी सकारात्मक कार्य जैसे- परीक्षा की तैयारी या फिर लाइट बिल  भरना आदि किसी ऐसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए थोड़ा चिंतित होना भी जरुरी है.

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी। ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

People May Also Search chinta kya hai, chinta ke karan, chinta ke upay, tension kaise hota hai, tension kaise dur kare,

 

About the Author: Juhi Mishra

You May Also Like

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *