बुद्धि परिक्षण एवं उसके प्रकार  

मनोविज्ञान में व्यक्ति की विभिन्नताओं एवं योग्यताओ का अध्ययन किया जाता है. बुद्धि मापने के लिए बुद्धि परीक्षाओं आदि की सुविधा मनोवैज्ञानिक द्वारा प्रदान की गई है. मनुष्य शारीरिक रूप के साथ मानसिक एवं बौद्धिक रूप से भी एक दूसरे से भिन्न होते है. ये भिन्नता जन्मजात होती है, किसी में आनुवंशिक भिन्नता तो किसी में पर्यावरणीय भिन्नता। कोई तेज बुद्धि का होता है, कोई मंद बुद्धि का, तो कोई जड़ बुद्धि का होता है. सामान्यतः सिखने, चिंतन करने, कल्पना करने की योग्यता बुद्धि कहलाती है. इससे पहले एक पोस्ट “बुद्धि क्या है”? hindicloud.com पर शेयर की जा चुकी है. आज के इस पोस्ट में हम बुद्धि परिक्षण के बारे में बात करेंगे. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके.

बुद्धि की मापन विधि को समझने से पहले यह जान लेते है की इसके सम्बन्ध में इसका प्रारंभिक इतिहास क्या रहा है

  • 1838 में प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एस्किवरल ने मंद बुद्धि लोगो की अनेक श्रेणियों में व्याख्या की.
  • 1879 में जर्मन के प्रसिद्द मनोवैज्ञानिक वुण्ट ने प्रथम प्रयोगशाला स्थापित की. इसमें बुद्धि मापने का कार्य यंत्र द्वारा किया जाता था.
  • 1882 में गाल्टन ने लन्दन में मानवीय विशेषताओं का अध्ययन करने के लिए एक प्रयोगशाला का निर्माण किया.

शिक्षा की विभिन्न समस्या जिनका सम्बन्ध बालक की बुद्धि से होता है, इन्हे परीक्षणों द्वारा हल किया जाता है. बुद्धि को बुद्धि-लब्धि के रूप में मापा जाता है जो एक संख्यात्मक मान है. व्यक्ति के वास्तविक बुद्धि-लब्धि ज्ञात करने के लिए मानसिक आयु को MA तथा शारीरिक आयु को CA से प्रस्तुत किया जाता है. आज हम बुद्धि परिक्षण के और भी कई प्रकार के बारे में जानेंगे.

बुद्धि के परीक्षाओं को मुख्यतः 2 भागों में विभाजित किया गया है

1- व्यक्तिगत परिक्षण तथा  2- सामूहिक परिक्षण. Nature of items के आधार पर इसे भी दो वर्गों में बांटा गया है.1- शाब्दिक परिक्षण तथा 2- अशाब्दिक परिक्षण.

शाब्दिक बुद्धि परिक्षण

जो परिक्षण भाषा अथवा शब्दों द्वारा किये जाते है, उन्हें शाब्दिक परिक्षण कहा जाता है. इन परिक्षण में परीक्षक छात्रों से अनेक प्रश्न पूछते है, जिनका उत्तर शब्दों के माध्यम से दिया जाता है. इस परिक्षण को वाचिक परिक्षण भी कहा जाता है. शाब्दिक परिक्षण भी 2 प्रकार से किये जाते है.

1- शाब्दिक व्यक्ति बुद्धि परिक्षण 

2- शाब्दिक समूह बुद्धि परिक्षण

  • शाब्दिक व्यक्ति बुद्धि परिक्षण- ये परिक्षण कुछ विशेष व्यक्ति पर किये जाते है. किसी एक व्यक्ति से भिन्न-भिन्न प्रकार का प्रश्न पूछा होता है. जटिल प्रश्नों के स्तर का निर्धारण आयु के दृष्टिकोण से किया जाता है. कम आयु के बच्चों से सरल प्रश्न तथा बड़ी आयु के व्यक्ति से कठिन  प्रश्न पूछा जाता है, जिन प्रश्नों का उत्तर शब्दों द्वारा देना होता है.
  • शाब्दिक समूह बुद्धि परिक्षण- इस परिक्षण का प्रयोग व्यक्ति के पुरे समूह पर किया जाता है. पुरे समूह के व्यक्ति के बुद्धि परिक्षण के लिए कुछ प्रश्न अथवा कार्यक्रम तैयार किये  जाते है. इन प्रश्नों को सभी सदस्यों को एक साथ दे दिया जाता है, और उन्हें इन प्रश्नों का उत्तर शब्दों के माध्यम से देना होता है.

अतः हम कह सकते है की ये परिक्षण बोलकर नहीं किये जा सकते है. इस परिक्षण का परिणाम जानने के लिए कभी-कभी कंप्यूटर भी उपयोग में लाया जाता है. जिससे समय एवं श्रम दोनों की बचत होती है. आर्मी अल्फा टेस्ट इसी प्रकार का बुद्धि परिक्षण है.

अशाब्दिक बुद्धि परिक्षण

इन परिक्षण में भाषा के स्थान पर क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है, अतः इसे क्रियात्मक परिक्षण भी कहा जाता है. इस परिक्षण में व्यक्ति के सामने कुछ विशेष वस्तुएँ और कुछ इधर-उधर घुमाकर दी गई समस्या के आधार पर  प्रश्न का समाधान करने के लिए कहा जाता है. जिससे इन परीक्षणों से  व्यक्ति के बुद्धि स्तर का मापन किया जाता है. ऐसे परिक्षण उस व्यक्ति के लिए है जो बोल नहीं सकते अथवा भाषा का प्रयोग करने में असमर्थ हो.                      अशाब्दिक परिक्षण भी दो प्रकार से किये गए है.

1- अशाब्दिक व्यक्ति बुद्धि परिक्षण

2- अशाब्दिक समूह बुद्धि परिक्षण

  • अशाब्दिक व्यक्ति बुद्धि परिक्षण- यह परिक्षण व्यक्ति के बुद्धि स्तर की जांच के लिए किये जाते है. इसमें व्यक्ति से यांत्रिक कार्य कराकर अथवा किसी अन्य क्रिया के द्वारा व्यक्ति के बुद्धि स्तर का मापन किया जाता है.
  • अशाब्दिक समूह बुद्धि परिक्षण- यह परिक्षण पुरे समूह के साथ किया जाता है. किसी एक समूह को कोई क्रियात्मक कार्य दे दिया जाता है जो उन्हें पूरा करना होता है. दी गई क्रिया के आधार पर उनका बौद्धिक परिक्षण किया जाता है.समस्त बुद्धि परिक्षण दो प्रकार से किये जाते हैं- एक व्यक्ति के ऊपर, तथा दूसरे समूह के ऊपर.

व्यक्तिगत और सामूहिक परीक्षणों में अंतर.

व्यक्तिगत बुद्धि परिक्षण

इस परिक्षण का आयोजन करने में श्रम एवं समय दोनों ही अधिक लगता हैं इसमें विद्यार्थी को अधिक सजगता से परीक्षा देना होता हैं. इस परिक्षण का परिणाम विश्वसनीय होने के साथ शुद्ध भी होता हैं. ये परिक्षण कम आयु के  बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं. इस परिक्षण में छात्र के गुण  एवं दोष को नजदीक से पता लगाया जा सकता हैं. इस परिक्षण में परीक्षक का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक हैं.  इसमें प्रयोगकर्ता तथा छात्र का सीधा सम्बन्ध होने के कारन उसमे घनिष्ठता अत्यधिक होती हैं.

सामूहिक बुद्धि परिक्षण

इस परिक्षण में पुरे समूह का परिक्षण एक साथ किया जाता हैं. सामूहिक परिक्षण होने के कारन कभी-कभी बच्चे इसके प्रति सजग नहीं होते. इन परीक्षणों का परिणाम कम विश्वसनीय होता हैं, और ये परिक्षण कम आयु के बच्चों के लिए जटिल होता हैं.  इस परिक्षण में परीक्षक का प्रकशित होना अनिवार्य नहीं हैं. इस परिक्षण में प्रयोगकर्ता तथा छात्र का सम्बन्ध न होकर पुरे समूह के साथ होने के कारन घनिष्ठता नहीं होती हैं.

प्रत्येक मानव शरीर में कुछ शक्तियाँ होती हैं. मानव शरीर में जन्म से ही उन शक्तियों एवं क्षमताओं में बुद्धि का एक महत्वपूर्ण स्थान होता है. बुद्धि से  ही मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है और आगे बढ़ता है.बुद्धि परिक्षण सर्वव्यापी परिक्षण है. इन परीक्षणों को भाषा, संस्कृति, धर्म, सामाजिक स्तर आदि सभी बंधनों से मुक्त माना गया है.

उम्मीद है, बुद्धि परिक्षण के बारे में यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी। ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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About the Author: Juhi Mishra

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