प्राकृतिक आपदा

आपदा प्राकृतिक हो या फिर मानवीय लेकिन जिव-जंतु के लिए दोनों ही विनाशकारी है. आपदा घटित होने से बहुत सारे नुकसान होते है लोगों की मौत होती है लोग अपने से बिछड़ जाते है. ऐसे विनाशकारी घटना से बचने के जितने उपाय बताया जाए वो काम है, फिर भी आपदा के बारे में आज आपसे एक छोटा सा पोस्ट शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके.

आपदा 2 प्रकार के होते है- १. प्राकृतिक आपदा २. मानवीय आपदा.

प्राकृतिक आपदा

प्राकृतिक आपदा ऐसे दबाबपूर्ण अनुभव हैं जो प्रकृतिक के प्रकोप के परिणाम हैं. जैसे- भूकंप, सुनामी, बाढ़, तूफ़ान, सूखा तथा ज्वालामुखी आदि.

मानवीय आपदा

मानवीय आपदा के परिणाम भी उतने ही भयंकर होते है जितने की प्राकृतिक आपदा के. इसीलिए इन घटनाओ को विपदा भी कहा जाता है. जैसे- युद्ध, महामारी, औद्यौगिक कारखानों में विषैली गैस तथा रेडियो सक्रिय तत्वों का रिसाव आदि.

प्राकृतिक विपदा आने से धन-सम्पति, जान- माल की हानि, प्रियजनों के अचानक खो जाने से व्यक्ति स्तब्ध तथा हक्के-बक्के हो जाते है।.प्राकृतिक विपदाएं अभिघातज अनुभव के लिए पर्याप्त होता है; विपदा के पश्चात् जीवित व्यक्ति का ह्रदय अत्यंत आहत हो जाता है. आहत होने के बाद व्यक्ति अनेक तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगता है, अनेक तरह के विकार उत्पन्न हो जाते है.
इस विकार के निम्नलिखित लक्षण है

अनैच्छिक प्रतिक्रया(unwanted reactions)

किसी विपदा के प्रति तात्कालिक प्रतिक्रया सामान्यतः आत्म-विस्मृति की होती है. व्यक्ति को समझने में कुछ समय लगता है की इस विपदा के आने के कारन व्यक्ति के जीवन में क्या अनर्थ हो गया है. वह यह स्वीकार नहीं कर पाते है की उनके साथ कोई भयंकर घटना घटी है.

शारीरिक प्रतिक्रया(physical reactions)

बिना कोई काम किये शारीरिक थकान, नींद में कठिनाई, भोजन में अरुचि, हृदयगति और रक्तचाप में वृद्धि तथा एकदम चौंकना पीड़ित व्यक्तियों में आसानी से देखने को मिल जाते है.

सांवेगिक प्रतिक्रिया(emotional reactions)

शोक एवं डर, चीड़-चिड़ापन, क्रोध, असहायता की भावना, निराशा, आदि सांवेगिक प्रतिक्रियाएं है. व्यक्ति स्वयं जीवित है, और वह अपने परिवार के सदस्य को बचने के लिए कुछ ना कर सका ऐसा उसे अपराधबोध होने लगता है, तो वह स्वयं को दोष देने लगता है. जिससे उसके नियमित जीवन प्रभावित होने लगता है.

संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया(cognitive reactions)

आकुलता, एकाग्रता में कठिनाई, या ऐसी स्मृतिया जो उसे ठीक से याद नहीं आ रही हो, यही संज्ञानात्मक प्रतिक्रिया कहलाती है.

सामाजिक प्रतिक्रया(social reactions)

प्रियजनों के साथ अक्सर वाद-विवाद और अस्वीकृति महसूस करना या अलग-अलग पड़ जाना, सामाजिक प्रतिक्रिया कहलाता है.इन घटनाओ को विपदा इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इन्हे रोका नहीं जा सकता, प्रायः ये किसी चेतावनी के आती है, तथा मानव जीवन एवं सम्पति को क्षतिग्रस्त कर जाती है. हम जानते है की अधिकांश प्राकृतिक विपदाओं की केवल सिमित स्तर तक ही भविष्याणि की जा सकती है. लेकिन उनके परिणामो को कम करने के लिए कई तैयारियां की जा सकती है. जैसे- चेतावनी, सुरक्षा उपाय, मनोवैज्ञानिक विकारो के उपचार इत्यादि. प्राकृतिक घटना से बचाव के उपाय.

यदि आप टेलीविजन देखते है तो अक्सर समाचार में वैज्ञानिक द्वारा घोषणा की जाती है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है की कुछ प्राकृतिक आपदा जैसे- भूकंप में यदि भविष्यवाणी कर भी दी जाए तब भी घटनाये इतनी आकस्मिक होती है की लोगो चेतावनी देना तथा उन्हें मानसिक रूप से तैयार करना संभव नहीं हो पाता.

 भूकंप की स्तिथि में क्या किया जाना चाहिए

  • भूकंपलेखी यन्त्र के द्वारा भूकम्पीय तरंगो का पूर्वानुमान किया जा सकता है.
  • भवनों का निर्माण भूकम्परोधी तरीको से किया जाना चाहिए. खासकर उन क्षेत्रो में जो भूकंप प्रभावित हो.
  • भूकंप के बाद राहत कार्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा विरोध दस्ते का गठन किया जाना चाहिए.
  • भूकम्पीय आपदा से निपटने के लिए गैर सरकारी संगठनों का भी निर्माण हो सकता है. ये संस्थाए ना सिर्फ राहत कार्य में मदद करती है, बल्कि भूकंप के पूर्व लोगो को भूकंप विरोधी भवन निर्माण तथा भूकंप के समय तत्काल बचाव हेतु प्रशिक्षित भी करती है.
  • भूकंप के दौरान खुले मैदानी क्षेत्रो में रहना चाहिए.

आग लगने की स्तिथि में

आग लगने की स्तिथि में प्रबंधन की 3 बड़ी जिम्मेदारी होती है-

  • आग में फंसे हुए लोगो को बहार निकलना।.घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार, जैसे- सबसे पहले उसके शरीर पर ठंढा पानी डालना, बर्फ से सहलाना, बरनोल जैसे औसधि से प्राथमिक उपचार करना तथा प्राथमिक उपचार के पश्चात उसे अस्पताल पहुँचाना.
  • आग के फैलाव को रोकना, जिसके लिए नजदीक में उपलब्ध बालू, मिटटी तथा यदि निकट में तालाब हो तो उसके जल का उपयोग कर आग बुझाने का प्रयास करना. झुग्गी-झोपड़ी को उखाड़ फेकना तथा विधुत लाइन को काट देना परम आवश्यक है.
  • अग्नि शामक दल को तत्काल बुलाना चाहिए.

ये प्रतिक्रियाएं दीर्घकाल तक चलती रह सकती है, किन्तु व्यक्ति को जीवन की शुरुआत करने के लिए अभिप्रेरित करना चाहिए. सर्वप्रथम लोगो को भौतिक सहायता; जैसे- भोजन, वस्त्र, औषधि तथा उपचार, शरण या आश्रय तथा वित्तीय सहायता इत्यादि प्रदान करना आवश्यक होता है. वे महिलायें जिनके सम्बन्धी हताहत हो गए तथा प्राकृतिक विपदाओं के उतरजीवी अनाथ बच्चों को विशेष देखभाल एवं उपचार की जरुरत होती है. उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, उन्हें ये विश्वास दिलाना चाहिए की वो इस दशा से सफलतापूर्वक बहार निकल सकते है.”जिन व्यक्तियों में तेज दबाब प्रतिक्रियाएं होती है उन्हें मनोरोग उपचार की विशेष आवश्यकता होती है”.

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी। ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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About the Author: Juhi Mishra

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