तनाव दूर करने के उपाय( Remedies Of Stress)

आजकल की भाग-दौर भरी जिंदगी में हर कोई तनाव से ग्रसित है.तनाव का सामना करने की व्यक्ति की योग्यता इस बात पर निर्भर करती है, की दैनिक जीवन की माँगों के प्रति संतुलन बनाये रखने , उनके सम्बन्ध में व्यवहार करने हेतु,  तथा अपने आप को व्यवस्थित बनाये रखने के लिए कितने तैयार है. तनाव के कारण अस्वस्थ जीवन शैली या स्वास्थ्य को हानि पहुँचाने वाले व्यवहार पैदा हो सकते है. तनाव से ग्रसित व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर कोई भी कार्य करने में अक्षम होते है. इस हालत में व्यक्ति पौष्टिक भोजन की और कम ध्यान देते है, सोते भी कम है तथा ऐसे व्यक्ति स्वास्थय के लिए जोखिम व्यवहार; जैसे- धूम्रपान तथा मदिरा का सेवन भी अत्यधिक मात्रा में करते है.तनाव कोई इलाज नहीं होता जब तक की हम खुद को ठीक करना ना चाहे। जिस वक्त से हम संतुलित रहना शुरू कर देते है उसी वक्त तनाव शब्द हमारे जिंदगी से गायब हो जाता है. तनाव प्रबंधन के बारे में जितनी समझ मुझे हुई उतना ही आज के इस पोस्ट में आप से शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके.

दरअसल हममें से अधिकतर लोग जिंदगी जीते नहीं काट रहे होते है. लेकिन जीने के सही कौशल को सीखा जा सकता है तथा उनमे सुधार कर उसे और बेहतर बनाया जा सकता है. समय प्रबंधन, सविवेक चिंतन, स्वयं की देखभाल, सम्बन्धों में सुधार के साथ  कुछ ऐसे जीवन कौशल, व्यक्तित्व हैं जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने और तनाव मुक्त रहने में सहायता करेंगे.

समय प्रबंधन(Time management)

समय प्रबंधन का प्रमुख नियम यह है की आप जिन कार्यों को महत्व देते है, उनका परिपालन करने में,  या उन कार्यों को करने में समय लगायें जो आपके लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो. आपको अपनी जानकारियों की असिलियत का ज्ञान हो तथा कार्य को निश्चित समयावधि में करना चाहिए. आप क्या करना चाहते है यह स्पष्ट होना चाहिए तथा अपने जीवन में इन सभी बातों में सामंजस्य स्थापित कर सके, इन पर समय प्रबंधन निर्भर करता है. समय प्रबंधन सिखने से, दबाब-मुक्त होने में मदद कर सकता है. समय के प्रत्यक्षण में परिवर्तन लाना तनाव दूर करने का एक उत्तम तरीका है.

सविवेक चिंतनशील(Self asses Thinking)

अपने गलत चिंतन तथा अविवेकी विश्वासों को चुनौती देना, नकारात्मक चिंतन के बदले अच्छा सोचना तथा गलत विचारो को मन से निकालना आदि ये सब सविवेक चिंतनशील के लक्षण है. मनुष्य के अनुभव करने तथा चिंतन के बिच घनिष्ठ सम्बन्ध है.तनाव संबन्धित विभिन्न समस्याएं गलत चिंतन के कारन उत्पन्न होती है. तनाव मुक्त होने का रामबाण उपाय है सविवेक चिंतनशील होना.

स्वयं की देखभाल(Self caring)

जब मनुष्य तनावग्रस्त अथवा चिंतित होता है तो उसकी सांस लेने की प्रक्रिया अधिक तेज हो जाती है, बार- बार प्यास लगती है, आदि.जब मनुष्य स्वयं को स्वस्थ रखता है तो वह दैनिक जीवन के तनावों का सामना करने के लिए  शारीरिक एवं भावनात्मक रूप से उचित ढंग से खुद को तैयार करता है.

दृढ़तापूर्ण(Assertiveness)

यह ऐसी योग्यता है जिससे किसी के निवेदन को स्वीकार न करना, किसी विषय पर बिना सोचे-समझे अपने विचारों को व्यक्त करना या फिर खुलकर अपने भावनाओं; जैसे- क्रोध, प्रेम आदि को व्यक्त करना संभव होता है. यदि व्यक्ति दृढ़निश्चयी हो तो उसमे उच्च आत्म-विश्वास एवं आत्म सम्मान तथा अभिमान की एक अटूट भावना होती है. दृढ़ता यदि सकारात्मक हो तो व्यक्ति हमेशा तनावमुक्त रहता है.

सकारात्मक सम्बन्ध(Positive relation)

इसके अंतर्गत तीन मुख्य बात आते है

  •  यह सुनना की दूसरा व्यक्ति क्या कह रहा है?
  •  व्यक्त करना की आप कैसा महसूस करते है और क्या सोचते है?
  • दुसरो की भावना तथा विचारो को स्वीकार करना, चाहे वे स्वयं आपके अपने विचारो से अलग है.

स्थाई, सुदृढ़ और विश्वास से भरे सम्बन्धों की कुंजी है ये 3 बाते. इसमें हमें नाराजगी तथा ईर्ष्या जैसे व्यवहार से दूर रहने की आवश्यकता है. अतः तनावमुक्त होना चाहते है तो सम्बन्धों में सुधार आवश्यक है.

गलत आदतों पर नियंत्रण(Control or uncooperative habits)

गलत आदत जैसे- काम को टालना, दुसरो की चुगली करना, कुछ ज्यादा ही पूर्णतावादी होना. पूर्णतावादी व्यक्ति वे होते है जिन्हे सब कुछ बिल्कुल सटीक चाहिए, यदि उनका कोई काम सही तरीके से नहीं होता वो जल्दी क्रोधित हो जाते. ऐसी ही कुछ गलत आदतों को नियंत्रित करने से आप तनाव के नियंत्रित कर पाएंगे।

स्वास्थ्य एवं व्यायाम(Health and exercise)

व्यायाम जीवन में वह परिवर्तन ला सकता है जो किसी और क्रिया से संभव नहीं है. नियमित रूप से व्यायाम तनाव एवं वजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है, तथा चिंता, तनाव एवं आलसीपन  को घटाने में मदद करता है. अच्छे स्वास्थ्य एवं तनाव कम करने के लिए खिंचाव वाले व्यायाम जरुरी है; जैसे- योग के आसान, तैरना, साइकिल चलाना, दौरना आदि. नियमित व्यायाम करने से हमारा मन शांत रहता है. नियमित व्यायाम तनाव रोकने का कार्य करती है.

आहार एवं पोषण(Meal and nutrition)

किसी व्यक्ति को कितने पोषण की आवश्यकता है, यह प्राणी की आनुवंशिक प्रकृति, सक्रियता स्तर, जलवायु तथा स्वास्थ्य के इतिहास पर निर्भर करता है. कोई व्यक्ति क्या भोजन करता है? तथा उसका वजन कितना है? इसमें व्यवहारात्मक प्रक्रियाएं निहित होती है. कुछ व्यक्ति पौष्टिक आहार तथा वजन का रखरखाव सफलता से कर लेते है, लेकिन कुछ दूसरे व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाते है. संतुलित आहार व्यक्ति के मनः स्थिति को सही कर सकता है, ऊर्जा प्रदान कर सकता है, पाचन शक्ति को सही रख सकता है, रोगों से बचाव कर सकता है, प्रतिरक्षक तंत्र को सशक्त बना सकता है. साथ ही साथ व्यक्ति को अत्यधिक अच्छा महसूस करा सकता है, जिससे व्यक्ति जीवन में तनावों का सामना सही ढंग से कर सके. स्वस्थ जीवन की कुंजी है, दिन में तीन बार संतुलित भोजन करना.

सकारत्मक प्रवृति(Positive attitude)

जीवन में उद्देश्य तथा उत्तरदायित्व की भावना, वास्तविकता का सही पहचान , अन्य व्यक्तियों के दृष्टिकोण के प्रति सहनशीलता  एवं स्वीकृति तथा सफल-असफल होने पर सही एवं गलत आदि को सकारात्मक स्वास्थ्य तथा कुशल-क्षेम सकारात्मक प्रवृति द्वारा प्राप्त की जा सकती है. अतः , खुलेपन तथा मजाकिया स्वाभाव, जिससे व्यक्ति खुद अपने ऊपर भी हँस सके, आदि ध्यान केंद्रित करने में मदद करते है. ऐसी स्वाभाव रखने से मनुष्य अपनी जिंदगी में तनाव का अनुभव ना के बराबर करता है. दबाब सम्बंधित हानिकारक प्रभाव की अनुभूति को डिस्ट्रेस एवं सकारात्मक प्रभाव की अनुभूति को यूस्ट्रेस्स की श्रेणी में रखा जाता है.

आशावादी चिंतन एवं अनुकूल परस्थिति(Optimistic thinking and Favourable circumstances)

आशावाद, जो की जीवन में अनुकूल परिस्थितियों के प्रति झुकाव है. सकारात्मक चिंतन की शक्ति तनाव से लड़ने तथा उसे कम करने के लिए अनुकूल मानी जाती  है. आशावादी मानते है की किसी भी मुसीबत का सफलता से सामना किया जा सकता है. जबकि निराशावादी अनर्थ या घोर संकट की ही उम्मीद करते है. आशावादी समस्या- केंद्रित सामना करने की योजनाओं का अधिक प्रयोग करते है तथा दूसरे से सहायता तथा सलाह मांगते है, जबकि निराशावादी तनाव में आकर उस लक्ष्य को ही छोड़ देते है जिसमे तनाव के कारण रुकावट आ रही हो. इसीलिए जीवन में सफलता पाने के लिए आशावान रहना बहुत जरुरी है.

तनाव के समय कोई व्यक्ति दुःख, दुश्चिंता तथा आत्म-सम्मान में हानि का अनुभव करता है. इस अवस्था में सहायक मित्र तथा परिवार यदि उसे यह विश्वास दिला दे की वह उनका प्रिय है, तो वह इस स्थिति से निकल सकता है और इन उपाय को अपने दिनचर्या में अपनाकर हमेशा तनावमुक्त रह सकता है. अपने जिंदगी  को सफल बना सकता है।

 

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी, और ऐसे ही कुछ आसान सा नियम अपनाकर आप तनावमुक्त हो सकते है । ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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