आध्यात्म क्या है और इसका महत्व क्या है?

अध्यात्म, जिसे अंग्रेजी में Spirituality कहते है. वैसे तो इसके बारें में जितना लिखा जाये या बताया जाये उतना ही काम है. कहने को तो छोटी मुँह बड़ी बात है. लेकिन, जितनी समझ मुझे हुई उतना ही आज के इस पोस्ट में आप से शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके. “आध्यात्म” एक ऐसा शब्द है, जिसे बोलने मात्र से ही मन को एक शांति  प्रदान होती है. वैसे तो आध्यात्म का रहस्य इतना गूढ़ है कि इसकी जितनी व्याख्या की जाए उतना ही कम है. लेकिन यहां हम आध्यात्म से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी बाते जानेंगे जिसे अपनाकर हम अपने जिंदगी का हर लक्ष्य प्राप्त कर सकते है.

“जो लोग बोधपूर्वक जीते है, उन्हें मौत का कोई डर नहीं होता”.

आध्यात्म का अर्थ

आध्यात्म एक चिंतन- धारा है, विद्या है, हमारी संस्कृति है. ऋषि -मुनियो के जीने का एकमात्र रास्ता है. आध्यात्मिक बल से हम कोई भी जंग जीत सकते है. आध्यात्म या ध्यान के मार्ग पर चलने निरंतर चलते रहने से जो उपलब्धियाँ प्राप्त होती है, उसे ही आध्यात्म के भाषा में मोक्ष या मुक्ति कहा जाता है.

आध्यात्म इस धरती पर युग-युगांतर से चलता आ रहा है.”आध्यात्म का दूसरा नाम ही धर्म है”. कोई भी नेक काम आध्यात्म के मार्ग से ही पूरा किया जा सकता है. संस्कृत  की एक वाक्य है. “अति सर्वत्र वर्जयेत” किसी  भी कार्य का अति नुकसानदेह है.  जीवन  पानी जरूरी है. लेकिन, ज्यादा पानी से भी नुक़सान हो जाता है. ठीक ऐसे में इस पृथ्वी पर जब कभी भी धर्म की हानि हुई है. अधर्म विजय की और अग्रसर होने लगा है, अधर्म का नाश करने के लिए भगवान ने जन्म लिया. यही धर्म और अध्यात्म है. कबीर दस का एक दोहा है.

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय,

जो दिल खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय।

अर्थ : जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला. जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है.

“किसी और की बुराई करने से पहले यह देख ले की हममे तो कोई बुराई नहीं है, यदि हो तो पहले उसे दूर करे”.

आध्यात्म के बारे में महान लोग

काश यह साहित्य मुझे पहले मिला होता , तो मैं राजनितिक में ना जाकर आध्यात्मिक शिक्षा ले रहा होता।“डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन”.
जैसे एक शमा बिना अग्नि के नहीं जल सकती, उसी तरह इंसान भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता “महात्मा बुद्ध”.
जो कुछ भी आपको शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाता है उसे जहर समझकर नकार दे. “स्वामी विवेकानंद”.
एक उच्चतम जीवन हमारे लिए शुरू होता है, जब हम अपनी स्वयं की इच्छा को एक दिव्य नियम के सामने झुकने के लिए त्याग देते है. “जॉर्ज इलियट”.
प्रार्थना ईश्वर को नहीं बदलती, लेकिन यह उसे बदल देती है जो प्रार्थना करता है. “सोरेन कियाकरगार्ड”.
जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करने में समर्थ बनिए। भगवान से यह मत कहिये की मुझे ही क्यों? बल्कि कहिये मुझे आजमाए। यही जिंदगी का जोश है.“विक्टर फ्रैंकेल”.

आध्यात्मिक जीवन और कैसे हो हमारी सोच

घमंड ना करे

जो लोग आध्यात्मिक चिंतन से विमुख होकर केवल लोकहित कार्य में लगे रहते है, वे अपनी ही सफलता अथवा सद्गुणों पर मोहित हो जाते है. वे अपने आपको आपको लोकसेवक के रूप में देखने लगते है. ऐसे अवस्था में वे आशा करते है की सब लोग उनके कार्यो की प्रशंसा करे, उनका कहा माने। उनका बढ़ा हुआ अभिमान उन्हें अनेक लोगो का शत्रु बना देता है. इससे उनकी लोकसेवा वास्तविक ना होकर लोकविनाश का रूप धारण कर लेती है.
आध्यात्मिक चिंतन से ही मनुष्य में विनम्रता आता है. यदि उससे कोई भूल हो भी जाए तो वह उसे समझकर उससे सुधारने  को कोशिश करता है.

भारतीय संस्कृति

हम जिस भारतीय संस्कृति, भारतीय, विचारधारा का प्रचार करना चाहते है, उससे हमारे समस्त कष्टों का निवारण हो सकता है. राजनितिक शक्ति से  हमारे अधिकारों की रक्षा हो सकती है, पर जिस स्थान से हमारे सुख-दुःख की उत्पति होती है उसका नियंत्रण राजनितिक शक्ति नहीं कर सकती, यह कार्य आध्यात्मिक उन्नति से ही संपन्न हो सकता है. मनुष्य को मनुष्य बनाने की वास्तविक शक्ति भारतयीय संस्कृति में ही है.  यह संस्कृति हमें सिखाती है की मनुष्य-मनुष्य से प्रेम करने को पैदा हुआ है, लड़ने-मरने को नहीं। अगर हमारे सभी कार्यक्रम ठीक ढंग से चलते रहे तो भारतीय संस्कृति का सूर्योदय अवश्य होगा।

अपने आप को धोखा ना दे

यदि आप अपनी शांति, सामर्थ्य और शक्ति चाहते है तो अपनी अंतरात्मा का सहारा पकड़े।  आप सारे संसार को धोखा दे सकते है, किन्तु अपने आत्मा को कौन धोखा दे सका है? क्यूंकि  आत्मा कभी झूठ नहीं बोलती है.
यदि प्रत्येक कार्य में आप अंतरात्मा की सम्मति प्राप्त कर लेंगे तो विवेकपथ नष्ट नहीं होगा। दुनिया भर का विरोध करने पर भी यदि आप अपनी अंतरात्मा का पालन कर सके तो सफलता प्राप्त करने से आपको कोई नहीं रोक सकता।
जब कोई मनुष्य अपने आपको अनोखा  व्यक्ति समझने लगता है, अपने आपको चरित्र में सबसे श्रेष्ठ मानने लगता है, तब उसका आध्यात्मिक पतन होने लगता है।

सज्जन बने

मन में सबके लिए सदभावना  रखना, सयमपूर्ण सच्चरित्रता के साथ समय व्यतीत करना, दुसरो की भलाई बन सके उसके लिए प्रयत्नशील रहना, वाणी को केवल सत्प्रयोजन के लिए ही बोलना, न्यायपूर्ण कमाई पर गुजारा करना, भगवान  का स्मरण करते रहना, अपने कर्त्यव पर अडिग रहना, अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थिति में विचलित ना होना। यही नियम है जिनका पालन करने से जीवन यज्ञमय बन जाता है. मनुष्य जीवन को सफल बना लेना ही सच्ची दूरदर्शिता और बुद्धिमता है.

” तब तक त्याग की भावना का उदय होना कठिन है, जब तक हमारे अंदर अहंकार की भावना रहेगी”.

क्षमाशील बने

“उठो; जागो; रुको मत; जब तक की लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए”।।

कोई दूसरा हमारे प्रति बुराई करे या निंदा करे, गलत  बात कहे तो उसको सहज करने और उसे उत्तर न देने से बैर आगे नहीं बढ़ता। अपने ही मन में कह लेना चाहिए की इसका सबसे अच्छा उत्तर ‘मौन’ है.

जो अपने कर्त्यव कार्य में व्यस्त रहता है और दुसरो के अवगुणो की खोज में नहीं रहता, उसे आंतरिक प्रसन्नता रहती है. जीवन में उतार चढाव आते ही रहते है. हँसते रहे, मुस्कुराते रहे.
“जो व्यक्ति अपनी मानसिक शक्ति स्थिर रखना चाहते है, उनको दुसरो की आलोचनाओं से चिढ़ना नहीं चाहिए”.

अकेलापन सबसे अच्छा

महान व्यक्ति सदैव अकेले चले है और इस अकेलेपन के कारन ही दूर तक चले है. अकेले व्यक्तियों ने अपने सहारे ही संसार के महानतम कार्य संपन्न किये है. उन्हें एकमात्र अपनी ही प्रेरणा प्राप्त हुई है. वे अपने ही आंतरिक सुख से सदैव प्रफुल्लित रहे है. दुसरो से दुःख मिटाने  की उन्होंने कभी आशा न रखी.अपने आत्मा को उन्होंने अपना सहारा माना।
अकेलापन जीवन का परम सत्य है.  किन्तु अकेलेपन से घबराना, जी तोडना, कर्तव्यपथ से निराश होना सबसे बड़ा पाप है. अकेलापन हमारे अंदर  में छिपी हुई महान शक्तियों को विकसित  करने का साधन है.

“अपने ऊपर आश्रित रहने से आप अपनी उच्चतम शक्ति को खोज निकलते है”.

जिम्मेदारी ले

अपने दोष दुसरो पर थोपने से कुछ हांसिल नहीं होता । हमारी शारीरिक एवं मानसिक दुर्बलताओं के लिए हम स्वयं ही जिम्मेदार होते है. अक्सर काम टालने की हमारी आदत होती है, जिससे हमारा काम सही से टाइम पर नहीं होता और हम परेशान होकर उस गलती के लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराते है, अच्छा होगा यदि हम  अपने को सुधारने का काम अपने  हाथ में लेकर हम अपनी शारीरिक और मानसिक परेशानियों से छुटकारा पायें।
प्रभाव उनका नहीं पड़ता जो बकवास तो बहुत करते है, पर स्वयं उस ढांचे में ढलते नहीं। जिन्होंने चिंतन और चरित्र का पालन  अपने जीवनक्रम में किया है, उनकी सेवा-साधना सदा फलती-फूलती रहती है.

वर्तमान में रहे

जब निराशा और असफलता को अपने चारो और मंडराते देखो तो समझो की आपका मन  स्थिर नहीं, आप अपने ऊपर विश्वास नहीं करते। जब तक की अपने पुराने सड़े -गले विचारो को बदलेंगे नहीं , तब तक आप अपने वर्तमान स्थिति से छुटकारा नहीं पा सकते। जब तक आप खुद के ऊपर विश्वास नहीं करते  तब तक आपके पैर उन्नति की और नहीं  बढ़  सकते। यदि आप अपनी वर्तमान अप्रिय अवस्था से छुटकारा पाना चाहते है तो अपनी मानसिक निर्बलता को दूर भगाये। अपने अंदर आत्मविश्वास जागृत करे.

आध्यात्म का सार

  • जब वेदव्यास मुनि ने 18 पुराणों की रचना कर ली, तब उन्होंने 18 पुराण का आध्यात्मिक सार सिर्फ 2  लाइन में बताया। “अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनदवयम।परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम”।। अर्थात आप परोपकारी हो तो वही पुण्य है, यदि आपके किसी काम से किसी को तकलीफ है तो वही पाप है।
  • आध्यात्म का मतलब बैठकर पूजा, भजन और ग्रन्थ पढ़ने से ही नहीं है.
  • आध्यात्म  का असली अर्थ तो परोपकारी  बनना, ईमानदार बनना, आशावान रहना, सच बोलना, खुद पर भरोसा करना, शांत रहना, दुसरो की इज्जत करना आदि है.

अस्त-व्यस्त जीवन जीना, जल्दबाजी करना, रात-दिन, व्यस्त रहना, हर पल-क्षण को काम काज में ठूसते रहना भी मनः क्षेत्र में भारी तनाव पैदा करते है। अतः यहाँ यह आवश्यक हो जाता है की अपनी जीवन-विधि को, दैनिक जीवन में  विवेकपूर्ण बनाकर चले.  ईमानदारी सयमशीलता, सज्जनता, नियमितता, सुव्यवस्था से भरा-पूरा हल्का-फुल्का जीवन जीने से ही मनः शक्ति का सदुपयोग होता है।कर्तव्य के पालन का आनंद लुटे और बाधाओं  से बिना डरे जूझते रहे, यही धर्म , जीवन, आध्यात्म का सारतत्व है.

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी। ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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