तनाव के कारण और इसके उपचार

अक्सर हम सभी एक शब्द इस्तेमाल करते रहते  है, की “अभी मेरा मूड नहीं” , “अभी मेरा मन नहीं” , “अभी टेंशन में हूँ” आदि. ये सभी एक ही शब्द है. बस नाम अलग है.

इस सबका एक ही मुख्य कारण है, गलत लाइफस्टाइल। फिर बाद में गलत लाइफस्टाइल के वजह से हम तनाव का शिकार हो जाते है। पहले तो तनाव का स्तर निम्न होता है, लेकिन बाद में इसका स्तर इस कदर बढ़ता है, की आमतौर पर मनुष्य डिप्रेशन, पागलपन यहाँ तक की कोई-कोई मौत के भी शिकार हो जाते है. तनाव में रहने के वजह से ना तो हम सही से कोई काम कर पाते है, ना ही हमारा कोई काम सही ढंग से होता है. बाद में हम अपनी योजना में असफल हो जाते है. लेकिन यदि हम अपने लाइफस्टाइल को सही कर ले तो हम तनाव मुक्त होकर प्रसन्न चित मन से हर काम करेंगे। जिस वक्त से हम संतुलित रहना शुरू कर देते है उसी वक्त तनाव शब्द हमारे जिंदगी से गायब हो जाता है. तनाव प्रबंधन के बारे में जितनी समझ मुझे हैं  उतना आज के इस पोस्ट में आप से शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके. तनावमुक्त रहने से  हमारा हर काम सही ढंग से होगा। अपनी योजना में सफल होने के साथ-साथ अपनी मंजिल तक पहुँच जाएंगे। हम सभी अपनी जीवन प्रसन्नतापूर्वक जी सकेंगे।

तनाव क्या है?

जो शारीरिक तथा मानसिक बेचैनी उत्पन्न कर रोग  निर्माण का कारक बन जाता है, बाद में यही से “तनाव” की स्तिथि पैदा होती है. जिससे अनेक रोग उत्पन्न होते है. जैसे:- धरकन बढ़ना, बाल झरना, बार-बार पेशाब आना, थरथराहट, संक्रमण आदि.

तनाव दो प्रकार के होते है

सकारात्मक तनाव ये तनाव हमारे लिए फायदेमंद होता है. अगर कोई काम हम अपनी ख़ुशी से करते है, जैसे:- प्रोजेक्ट या असाइनमेंट बनाना या फिर परीक्षा की तैयारी के दिनों में हल्का दबाब महसूस करना ही हमें सफलता दिलाता है.

नकारात्मक तनाव ये तनाव हमें चुनौती तथा अधिक बोझ का अहसास कराता है. यदि कोई काम हमें जबरदस्ती करना पड़े. जैसे:- ऑफिस में बॉस यदि हमसे हमारे मर्जी के खिलाफ काम करवाए तो उस वक़्त हम अनियंत्रित हो जाते है. तभी हमारे ऊपर नकारात्मक प्रभाव परता है.

“एक स्वस्थ व्यक्ति के दिमाग में, बेवजह का तनाव असाध्य रोग के सामान है”

 

तनाव के कारण

  • जीवन- यापन की गलत शैली अपनाकर ही लोग हर दिन नए- नए किस्म की ऐसे बीमारियों से घिरते जा रहे है. कुछ साल पहले वैज्ञानिक, बौद्धिक, आर्थिक प्रगति उतनी नहीं थी, जितनी की आज है. पहले हमारे पूर्वज हल्की- फुल्की जिंदगी जीने के अभ्यस्त थे. चिंताओं- कुंठाओ से उतने नहीं घिरे रहते थे, लेकिन आजकल तो हर कोई यहाँ तक की पढ़े- लिखे ‘सभ्य’ मनुष्य भी इसका शिकार हो रहे है.
  • नए परस्थितियो में नए किस्म के ऐसे रोग उत्पन्न हो रहे है, जिनका उल्लेख चिकित्सा ग्रंथो में भी नहीं मिलता और चिकित्सको को अनुमान के आधार पर इलाज का तीर- तुक्का बैठाना पड़ता है. वर्तमान समय में 60% से अधिक रोगी तनाव से रोगग्रस्त पाए गए है. चिकित्सको एवं मनोवैज्ञानिकों का कहना है, की लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, आँखों में सुर्खी आना, काम में मन न लगना लकवा आदि. इन जैसे रोगो का आक्रमण हो जाना, ये सभी अत्यधिक तनाव के ही परिणाम है.
  • न्यूयार्क के एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया है, की दुसरो पर दोषारोपण करने वाले, अत्यधिक भावुक एवं जल्दीबाजी करने वाले लोग तनाव के अधिक शिकार होते है.  तनाव से मुक्ति, व्यक्ति स्वयं ही पा सकता है.

तनाव के मूल कारण ‘हम खुद’

तनाव एक ऐसा शब्द है, जो हम खुद से खुद के लिए पैदा करते है. तनाव ना तो हमें कोई दे सकता है, ना हम किसी से ले सकते है. लेकिन अपनी नासमझी की वजह से हम खुद इसके नियंत्रण में आकर इसका शिकार बन जाते है.
तनाव से मुक्त रहने के लिए अपनी क्षमता भर अच्छे से अच्छा काम करे. इसमें बाहरी सहायता या मार्गदर्शन कुछ विशेष कारगर सिद्ध नहीं होता। अपने द्वारा उत्पन्न किये गए तनाव को कोई दूसरा दूर कैसे कर सकता है.
अक्सर हम निरर्थक एवं महत्वहीन बातो को अधिक महत्व देकर अकारण ही तनाव को आमंत्रित करके सबसे बड़ी गलती करते है. बाद में पता चलता है की वह झाड़ी के भूत के तरह कल्पना मात्र थी.

ब्लड प्रेशर, दिल का दौरा अब हर उम्र, निम्न वर्ग से लेकर उच्च वर्ग के लोगो में भी पनप रहा है। इसका मूल कारण हम खुद है। लोग  अधिक आराम का जीवन जीना चाहते है। परिश्रम से बचना चाहते है। आमदनी से अधिक खर्च बढाकर अधिक से अधिक चिंताओं का घेरा मकरी की जाल की तरह बून लेते है। ऐसे लोग प्रायः अपनी दुर्दशा और रोगो के उत्पत्ति के लिए कभी मौसम, कभी आहार को, कभी दुसरो को , कभी परिस्थितियों आदि को दोष देते है.

‘अधिक  तनाव शरीर व तन दोनों के लिए हानिकारक है’.

 

तनाव से होने वाले शारीरिक, मानसिक और अन्य प्रभाव

तनाव ना सिर्फ हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थय को प्रभावित करती है, बल्कि पारिवारिक रिश्तो पर भी अपना छाप छोड़ जाती है।
“life extension foundation “ नामक संस्था के संचालको ने पता लगाया है, की व्यक्तियों में निराशा, असफलता, हार की भावना, निर्णय करने में दुविधा की स्तिथि एवं चिंता आदि तनाव को जन्म देती है.

तनाव में शारीरिक अवस्था

जब किसी व्यक्ति को मनोरोग होता है तो उस दशा में उसके किसी अंग में विशेष प्रकार की क्रियाशीलता देखि जाती है. किसी में अक्ल की वृद्धि तो किसी के हृदय की धरकन में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है. इस दशा का निर्धारण रक्त में कसकलाइंस एड्रिनलिन और नार एड्रिनलिन की वृद्धि की जांच कर के किया जा सकता है.

तनाव में मानसिक अवस्था

इस स्तिथि में व्यक्ति के मन में एक तेज आघात होता है. जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति के स्वाभाव में परेशानी  व चिरचिरापन आ जाता है. किसी भी प्रकार की बात उसके लिए परेशानी  का कारण बन जाती है. बार-बार नींद का टूटना व सिहरन तथा कंपकपी आदि प्रकार के लक्षण प्रकट होने लगते है. इस स्तिथि की जानकारी रक्त में न्यूरोट्रांसमीटर ऐसेटिलक्लोरिन के स्तर को नापकर लगाईं जा सकती है.

शारीरिक अंगो की दशा

इस स्तिथि में आते-जाते रोगी के शारीरिक व मानसिक लक्षणों की सक्रियता तो कम होती है, किन्तु धीरे-धीरे सम्बंधित अंगो में स्थायी रूप से उसका प्रभाव पड़ने लगता है, जैसे- दाह, कमजोरी आदि के साथ  पैप्टिक अल्सर, कारोनरी आदि रोगो के लक्षण स्पष्ट होने लगते है.

तनाव से कैंसर

कैंसर रोग पर हुए अनुसंधानों से यह प्रकाश में आया है, की जब व्यक्ति का आहार, आचरण एवं व्यवहार दूषित  तत्वों से भर जाता है. उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, वह तम्बाकू, शराब आदि विषैली चीजों के चंगुल में अपने को फंसा लेता है, तो इस रोग का आरम्भ  हो जाता है.
अमेरिका के एक रिसर्च केंद्र “हीलिंग आर्ट्स सेन्टर” ने कैंसर रोग का प्रमुख कारण ‘मन’ माना जाता है. असफलता, पराजय, निराशा आदि से ग्रसित व्यक्ति बहुत जल्दी ही इस रोग का शिकार  हो जाता है.

मेक्सिको के डॉ. अर्नेस्टो कन्ट्रोरेख ने बताया है, की इस रोग की प्रारंभिक अवस्था में आहार-विहार सम्बन्धी सुधार किया जाए, बुरी आदतों को ठीक किया जाए प्रेम, सुख व शांति की वृद्धि की जाए तो कैंसर से मुक्ति पाई जा सकती है. उन्होंने इस चिकित्सक पद्धति को “लैटरिएल चिकित्सा प्रणाली” का नाम दिया।

तनाव के प्रभाव रिश्तो पर

सामान्यतः घरो में तनाव का कारण पति-पत्नी का आपसी मेल न बैठ पाना होता है। पत्नी, पति को उकसाती है. पति, पत्नियों को रसोई आदि कार्यो के लिए तंग करते है. परस्पर संतुलन ना हो पाने से दोनों तनाव से ग्रसित हो जाते है.
इसका दुष्परिणाम यह होता है, की माता-पिता की कलह देखकर बच्चे भी तनाव से ग्रसित हो जाते है, बल्कि पूरा घर ही नरक बन जाता है.
इस नरक से निकलने का रास्ता एक ही है, की आपस में सामंजस्य बिठाया जाए. प्रेम, आत्मीयता, सदभावना, सहयोग आदि से परिवार स्वर्गीय आनंद का उपवन बन सकता है. रहन-सहन में नियमितता लाने से परस्पर स्नेह-सदभावना से तनाव की बिमारी से मुक्ति मिल सकती है.

तनाव का प्रभाव काम पर

एक कंपनी के मेडिकल डायरेक्टर ने एक बार देखा की, कुछ उच्च पदों के अधिकारी उत्तेजना और खिन्नता की स्तिथि में है, कोई भी काम सही तरीके से नहीं हो रहा है.
एक दिन कंपनी के president ने आकर उनको थका-थका सा तनावग्रस्त देखा तो, मेडिकल डायरेक्टर ने उन्हें तनाव कम करने के लिए छुटियाँ लेकर विश्राम करने को कहा. कुछ दिन बाद जब वो लोग विश्रांम करके वापस आये तो उनका परिक्षण किया गया. परिक्षण करने पर पहले से अधिक शांत, प्रसन्न पाए गए. खूब मन लगाकर काम करने लगे. काम समय में अधिक काम करने लगे, अधिक जिम्मेदारियाँ  कार्य सरलतापूर्वक करने में सक्षम हो गए.

तनाव मुक्त रहने के उपाय

  • तनावग्रस्त ना होने देने के लिए दृढ निश्चय, लगन एवं सतत निष्ठापूर्वक सही कार्यो में लगे रहना ही सर्वोत्तम उपाय है.
  • सदा सहनशीलता से काम लिया जाए. भविष्य के भय से भयभीत ना हो. वास्विकता को समझे, काल्पनिक बाधा या आशंका को महत्व ना दे
  • वर्तमान में सामने आये काम को पूरी तत्परता से संपन्न करे, उसी के सम्बन्ध में सोचे, आशावान रहे.
    अपने खान-पान का पूरा ध्यान रखे, सात्विक भोजन करे, भरपूर नींद ले. हमेशा सकारात्मक सोचे।
  • सबसे महत्वपूर्ण- योगाभ्यास, प्राणायाम- ध्यान रोज करे. जो काम औषधि उपचार से नहीं हो पाता, वह इन प्रयासों से सरलतापूर्वक होते देखा गया है. यदि इस ओर अधिक ध्यान दिया जाए, इस क्षेत्र में शोध प्रयासों को बढ़ाया जाए, तो ऐसे सूत्र हाथ लगने की संभावना है, जो मानसिक तनाव के उपचार के साथ-साथ तनाव उत्पन्न  होने से पहले ही इसे रोकथाम करने से पहले ही कारगर सिद्ध हो.
  • मानसिक तनाव को ध्यान द्वारा तथा शारीरिक तनाव को योग-प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से नियंत्रित किया जा सकता है।

“२ वर्षो से योग-ध्यान-प्राणायाम कर रहे ११ व्यक्तियों में मानसिक तनाव व तनावजनित रोग लगभग शुन्य हो गए”

तनाव निवारण औषधियों तथा कृत्रिम उपकरणों से संभव नहीं। इसके लिए मानव जाती को आध्यात्म की शरण लेनी ही होगी। ऐसा करने से स्वयं ही अपने भीतर एक ऐसे शक्ति का अनुभव होगा, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, जो समस्याओ को सुलझाने में सहायक होगी और मन प्रसन्नचित रहेगा।

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी और आप अपने तनाव को नियंत्रित कर पाएंगे।  ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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About the Author: Juhi Mishra

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