योग मनोविज्ञान

दोस्तों आज हम बात करेंगे योग मनोविज्ञान के बारे में. मनोविज्ञान का यदि हम ऐतिहासिक अवलोकन करे तो हम पाएंगे की , मनोविज्ञान शुरू से ही आत्मा, मस्तिष्क, चेतना तथा व्यवहार के विज्ञान से जुड़ा हुआ है. वही दूसरी तरफ योग में भी आत्मा के स्वरुप से जोड़ा गया है. योग के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है, फिर भी योग मनोविज्ञान की जितनी समझ मुझे हुई उतना ही आज के इस पोस्ट में आप से शेयर कर रही हूँ. HindiCloud.Com पर जो भी जानकारी शेयर की जा रही है, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, हमारे रीडर्स को सही और पूरी जानकारी मिल सके.

“योग-ध्यान का दूसरा रूप अपने अंतरात्मा से मिलना, अपने आप को जानना है. जिसने अपने आप को जान लिया उसके लिए कोई भी कार्य दुष्कर नहीं”.

योग मनोविज्ञान 

योगीजन पूर्णरूप से आसक्तिरहित कर्म करते है. कोई इसे योग कहता है, कोई इसे संन्यास कहता है. गीता में इसे ही कर्मयोग कहा गया है. योग और मनोविज्ञान दो अलग-अलग शब्द है, दोनों के अलग-अलग अर्थ भी है.’ मनोविज्ञान व्यक्ति की संवेगात्मक स्तिथि का वर्णन करता है, व्यक्ति के मन का अध्ययन करता है. जबकि योग में संवेगात्मक स्तिथि समाप्त हो जाती है, व्यक्ति पूर्णरूप से प्रकृति से जुड़ जाता है’. इस संवेगात्मक स्तिथि अथवा मनुष्य की अभिलाषाएं तथा चित की विभिन्न वृत्तयो को किस प्रकार नियंत्रित किया जाए, योग मनोविज्ञान यही बताता है.

योग मनोविज्ञान क्या है?

ऐसे कार्य जिनको करने से मन को प्रसन्नता व स्वास्थ्यता का अनुभव हो, उसे योग की परिधि में रखा जाता है. “चित्तवृत्ति का निरोध ही योग है”.मनोविज्ञान मनुष्य के व्यवहार का अध्ययन करने वाला विज्ञान है.
अतः दोनों परिभाषाओं के आधार पर हम यह कह सकते है की योग मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन कर उसे यौगिक क्रियाओं के द्वारा व्यक्ति को परिपक्व बनाने में सहायता करता है.

“प्रकृति को मनोवैज्ञानिक ढंग से जानकर, प्रकृति के अनुरूप विभिन्न शारीरिक क्रियाएं कर स्वयं को स्वस्थ व सुदृढ़ बनाना ही योग मनोविज्ञान है”.

योग मनोविज्ञान के बारे में महान लोग

  • योग मनोविज्ञान वातावरण के अनुकूल व्यक्ति के क्रिया-कलापों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उसे भावनाओं  पर नियंत्रण करने की यौगिक विधियों से अवगत कराने वाला विज्ञान है- “आर.के.वैद्य”.
  • जीवन में हज़ारों लड़ाइयाँ जितने से अच्छा है की तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो. फिर जीत हमेशा तुम्हारी होगी, इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता- “गौतम बुद्ध”.
  • योग मनोविज्ञान में व्यक्ति संदेहात्मक स्तिथि से दूर होकर, भावनात्मक स्तिथि को दूर करने में विजय प्राप्त कर लेता है- “विजय वैद्य”.
  • योग मनोविज्ञान अनुभव एवं यौगिक क्रियाओं के आधार पर किये गए आंतरिक अनुभव एवं बाहरी  व्यवहार को जानने में मदद करता है- “कैमरान”.

योग मनोविज्ञान की प्रकृति

भारतीय योग मनोविज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ पतंजलि कृत योगसूत्र है. योग दर्शन एक ऐसा सटीक प्रावधान है जो मन या चित को शांत करता है.
भारतीय बाग्मय में मनोविज्ञान का स्वतंत्र रूप से अध्ययन-मनन किया जा सकता है. योग मनुष्य के क्षमताओं के विकास की पद्धति है. यह ना केवल हमारे शरीर को बल्कि मन को भी स्वस्थ बनाकर आत्मज्ञान के विभिन्न कोटियों को पार कर तीनो व्याधियों- आधिभौतिक, आधिदैनिक, आध्यात्मिक दुखो से मुक्ति का साधन है.
भारतीय योग मनोविज्ञान भौतिक उपलब्धियों को हीन मानता  है, जबकि आत्मज्ञान को श्रेष्ठ उपलब्धि के रूप में स्वीकार करता है. केवल ज्ञान ही उसका चरम ध्येय है.
योग के विभिन्न साधन; जैसे- आसान, प्राणायाम, मुद्राये, षट्कर्म, आदि के द्वारा शारीरिक एवं मानसिक विकृतियों को दूर किया जा सकता है.
यह प्रणाली गंभीर एवं विश्लेषणात्मक है. विश्लेषणात्मक इसलिए की इसके माध्यम से मन के चेतन-अचेतन स्तरों का अध्ययन किया जाता है। गंभीर इसलिए की इन स्तरों से परे योगविज्ञानिक सूक्ष्मस्तरो को अनुभव करता है.

योग मनोविज्ञान का महत्व

भारतीय दर्शन में योग मनोविज्ञान का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है. भारतीय जीवन शैली में योग मनोविज्ञान अति प्राचीन है. सभ्यता के प्रारम्भ से ही योग का कही न कही अवश्य प्रयोग एवं अनुभव किया जाता रहा है.
योग दर्शन में मन का अध्ययन, मन का संयम , चित की एकाग्रता जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है. चाहे वह सांख्य दर्शन हो, न्याय या वैशेषिक दर्शन हो, वेदांत दर्शन हो अथवा जैन दर्शन हो या बौद्ध. सांख्य में पांच भूतो से लेकर महत तत्व तक सभी तत्व मनोविज्ञान की परिधि में आते है.

योग मनोविज्ञान चित के स्वरुप को जानने में मदद करता है.योग मनोविज्ञान चित को एकाग्र रखने मदद करता है.
योग मनोविज्ञान परमतत्व और खुद को जानने मदद करता है.सांख्य  दर्शन के अंतर्गत प्रकृति से उत्पन्न बुद्धि तथा महत तत्व ही समस्त सृष्टि का मूल है. और बुद्धि का वास्तविक ज्ञान योग से होता है.

उम्मीद है, यह जानकारी आपके जीवन में नया परिवर्तन लाएगी। ऐसी ही  जानकारी के लिए HindiCloud.Com लगातार पढ़ते रहिये। इस जानकारी से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत  पूछना चाहते हो तो निचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो.

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About the Author: Juhi Mishra

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